Cavad Yatra Controvercy: हर साल आने वाली कांवड़ यात्रा इस बार भी विवादों में घिरी हुई है. धार्मिक आस्था का यह बड़ा पर्व, जिस दौरान लाखों श्रद्धालु गंगा जल लेकर अपने मंदिरों में जाते हैं, इस बार राजनीति और धर्म के गठजोड़ का केंद्र बन गया है. आइए जानते हैं कि आखिर इस बार कांवड़ यात्रा विवाद में क्या नया है और इस पर क्या-क्या प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.

Cavad Yatra Controvercy: विवाद की जड़ें!
इस बार का विवाद मुख्य रूप से कुछ राज्यों में कांवड़ यात्रा मार्गों पर दुकानों के नाम प्रदर्शित करने के आदेश को लेकर शुरू हुआ. सरकार का तर्क था कि इससे कानून व्यवस्था बनाए रखने में आसानी होगी और श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं होगी. लेकिन विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस आदेश को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया और इसे एक साजिश करार दिया.
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विपक्ष का विरोध
विपक्ष ने इस आदेश को सांप्रदायिकता फैलाने की कोशिश बताया है. उनका कहना है कि यह आदेश विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के दुकानदारों को निशाना बना रहा है. विपक्ष ने इस आदेश के खिलाफ कई जगह प्रदर्शन भी किए और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की.
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि यह आदेश किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया कदम है. सरकार का तर्क है कि कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग एक साथ होते हैं और ऐसे में किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए यह जरूरी है कि सभी दुकानों के नाम प्रदर्शित हों.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप किया और सरकार के आदेश पर रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा कि इस तरह के आदेश से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है. कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह इस मामले में सभी पक्षों को सुनकर एक नया आदेश जारी करे.
जनता की प्रतिक्रिया
इस विवाद पर जनता की प्रतिक्रियाएं भी काफी विभाजित हैं. कुछ लोग सरकार के फैसले का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ लोग विपक्ष के साथ खड़े हैं. सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर काफी बहस हो रही है.